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Essay On Anti Corruption In Hindi

सारी दुनिया जानती है कि भ्रष्टाचार अपने देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा है. लेकिन सबको यह भी मालूम है कि भ्रष्टाचार को ख़त्म करना बहुत आसान नहीं है. सरकार ने बहुत सारे ऐसे विभाग बना रखे हैं जिनका काम भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है लेकिन देखा यह गया है कि भ्रष्टाचार को रोकने की कोशिश करने वाले विभागों के अफसर उसी भ्रष्टाचार के आशीर्वाद से बहुत ही संपन्न हो जाते हैं.

सबसे दिलचस्प बात यह है कि लगभग सभी भ्रष्टाचारी अपनी अपनी छतों पर खड़े हो कर बांग देते रहते हैं कि भ्रष्टाचार को ख़त्म करना ज़रूरी है लेकिन उनकी पूरी कोशिश यही रहती है कि चोरी-बे ईमानी का धंधा चलता रहे. एक बात और भी बहुत सच है कि सभी अफसर भ्रष्ट नहीं होते, कुछ बहुत ही ईमान दार होते हैं. उत्तर प्रदेश जैसे भ्रष्ट अफसर शाही वाले राज्य में भी कुछ ऐसे ईमानदार अफसर हैं कि कि वे दामन निचोड़ दें तो अमृत हो जाए. लेकिन वे संख्या में बहुत कम हैं लेकिन हैं ज़रूर.

उत्तर प्रदेश के इन्हीं ईमानदार अफसरों ने अपने ही बीच के भ्रष्ट अफसरों की लिस्ट बनायी थी, लेकिन कुछ कर नहीं सके क्योंकि उन्हीं भ्रष्टतम अफसरों में से कुछ तो मुख्य सचिव की गद्दी तक पंहुच गए. राज्य में भ्रष्टाचार कम करने की कोशिश कर रहे ऐसे ही एक अफसर, विजय शंकर पाण्डेय ने अपने एक ताज़ा लेख में लिखा है कि आई ए एस अफसर की संपत्ति के हर पैसे का हिसाब होना चाहिए. निजी जीवन में भी श्री पाण्डेय ईमान दार हैं. लेकिन कुछ नहीं कर पा रहे हैं.

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बहर हाल एक खुशी की खबर है कि कुछ अवकाश प्राप्त सिविल, पुलिस और न्यायपालिका के अधिकारियों ने एक नयी पहल शुरू की है जिसके तहत सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार को ख़त्म करने में मदद मिलेगी. इन अधिकारियों ने एक सार्वजनिक अपील भी जारी की है और आम जनता से कहा है कि अगर सब चौकन्ना रहें तो अपने देश की संपत्ति को बे-ईमान अफसरों और नेताओं से बचाया जा सकता है.

भारत के पूर्व मुख्य नायाधीश, जस्टिस आर सी लाहोटी, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त जे एम लिन्दोह, पूर्व सीएजी वीके शुंगलू पूर्व पुलिस महानिदेशकों प्रकाश सिंह और जेएफ रिबेरो आदि ईमान दार लोगों की तरफ से जारी एक बयान में लोगों से अपील की गयी है कि बड़े आदमियों की बीच के भ्रष्टाचार को रोकने और भारत की चोरी की गयी सम्पदा को वापस लेने के लिए एक अभियान की ज़रुरत है.

अपील में कहा गया है कि भारत सरकार के सर्वोच्च पदों पर रह चुके लोगों में इस बात पर एक राय है कि कि भ्रष्टाचार ऊपर से नीचे को बहता है. और जब तक टाप पर बैठे लोगों को अपने काम में ईमानदारी से रहने को मजबूर नहीं किया जाएगा, इस देश का कोई भला नहीं हो सकता. भ्रष्टाचार इस देश में अपराध है. इसलिए भ्रष्ट और घूसखोर सरकारी अधिकारियों को गिरफ्तार करके जेल भेजना चाहिए. बड़े पदों पर काम करने वाले लोगों को अपनी सारी संपत्ति का हिसाब देना चाहिए और उसे सार्वजनिक करना चाहिए.

इन बड़े अधिकारियों ने साफ़ कहा है कि भ्रष्ट सरकारी अफसर अक्सर बच जाते हैं क्योंकि उन्हें सज़ा देने की जिनकी ज़िम्मेदारी होती है , वही भ्रष्ट होते हैं. इन लोगों को ज़बरदस्त सज़ा दी जानी चाहिए. घूस की कमाई का करीब सत्तर लाख करोड़ रूपया विदेशों में जमा है, उसको वापस लाने की कोशिश की जानी चाहिए. अगार विदेश में जमा किया गया इन बेईमानों का पैसा वापस लाया गया तो अपने देश की गरीबी हमेशा के लिए हट जायेगी.

अपील में कहा गया है कि मौजूदा सिस्टम बिलकुल बेकार हो चुका है. क्योंकि भ्रष्टाचार से लड़ने की अपनी विश्वसनीयता गंवा चुका है. जिन लोगों को ज़िम्मेदारी के पदों पर बैठाया गया है ,उनमें बहुत सारे लोग भ्रष्ट राजनीतिक नेताओं के सामने गिडगिडाने लगते हैं. यह बिलकुल गलत बात है. इस पर भी रोक लगानी चाहिए. भ्रष्टाचार और अपराध के बीच बहुत ही गहरा सम्बन्ध है. और दोनों ही एक दूसरे को बढ़ावा देते हैं. इन दोनों के घाल मेल की वजह से ही फासिज्म का जन्म होता है जिसमें लोक तंत्र को पूरी तरह से दफ़न कर देने की ताक़त होती है. इन ईमानदार अफसरों का कहना है कि अगर अपने मुल्क में लोक तंत्र को जिंदा रखना है कि भ्रष्टाचार को जड़ से तबाह करना होगा.

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लेकिन यह इतना आसान नहीं है. सभी जानते हैं कि घूस और भ्रष्टाचार में शामिल ज़्यादातर लोग बहुत ही ताक़त वर लोग हैं. उन्हें उनकी जगहों से बे दखल कर पाना आसान नहीं होगा. लेकिन अपील में कहा गया है कि भ्रष्टाचार में शामिल लोगों को पकड़ने और उन्हें जेल भेजने के लिए एक आन्दोलन की ज़रुरत है. ज़रुरत इस बात की भी है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस मुहिम में शामिल हों और सवाल पूछें.

इन पूर्व अधिकारियों ने एक वेबसाईट भी बनाया है जिसमें आन्दोलन की रूप रेखा बतायी गयी है. इन लोगों ने बहुत सारे लेख भी छापे हैं जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रस्तावित लड़ाई को मज़बूत करने की अपील की गयी है. ऐसा ही एक लेख उत्तर प्रदेश के कद्दावर अफसर विजय शंकर पाण्डेय का है जिन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ बहुत दिनों से एक मुहिम चला रखी है.

सवाल पैदा होता है कि क्या श्री पाण्डेय जैसा अफसर अपने आस पास नज़र डालने पर सब कुछ बहुत ही ईमानदारी से भरा हुआ पाता है. क्या उन्होंने अपने दफतर या बगल वाले कमरे में चल रहे बे ईमानी की सौदों पर कभी नज़र डाली है. सही बात यह है कि जब तक केवल बातों बातों में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी जायेगी तब तक कुछ नहीं होगा.

इस आन्दोअल्न को अगर तेज़ करना है कि तो घूस के पैसे को तिरस्कार की नज़र से देखना पड़ेगा. क्योंकि सारी मुसीबत की जड़ यही है कि चोर, बे-ईमान और घूसखोर अफसर और नेता रिश्वत के बल पर समाज में सम्मान पाते रहते हैं. उत्तर प्रदेश सरकार में बहुत बड़े पद पर बैठे श्री पाण्डेय के लिए यह बहुत ज़रूरी है. क्योंकि उनकी निजी ईमानदारी बेमिसाल है लेकिन जब तक सिस्टम में ईमनदारी नहीं होगी समाज का भला नहीं होगा.

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अपने देश में पिछले 20 वर्षों में घूसखोरी को सम्मान का दर्जा मिल गया है. वरना यहाँ पर दस हज़ार रूपये का घूस लेने के अपराध में जवाहर लाल नेहरू ने, अपने एक मंत्री को बर्खास्त कर दिया था. लेकिन इस तरह के उदाहरण बहुत कम हैं. इसी देश में जैन हवाला काण्ड हुआ था जिसमें सभी गैर कम्युनिस्ट पार्टियों के नेता शामिल थे. स्वर्गीय मधु लिमये अपनी मृत्यु के पहले इस बात को लेकर बहुत दुखी रहा करते थे.

सरकारी कंपनियों में विनिवेश के नाम पर जो घूसखोरी इस देश में हुई है. उसे पूरे देश जानता है. उत्तर प्रदेश के एक पूर्व मुख्य सचिव के यहाँ से 250 करोड़ रूपये ज़ब्त किये गए थे. इस तरह के हज़ारों मामले हैं जिन पर लगाम लगाए बिना भ्रष्टाचार को खत्म कर सकना असंभव है. इस लिए पूर्व सरकारी अधिकारियों की इस पहल का स्वागत किया जाना चाहिए और मीडिया समेत सभी ऐसे लोगों को सामने आना चाहिए जो पब्लिक ओपीनियन को दिशा देते हैं ताकि अपने देश और अपने लोक तंत्र को बचाया जा सके.

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भ्रष्टाचार की समस्या पर हिंदी निबंध (Find Long Essay on Bhrashtachar Mukht Bharat (Corruption Free India) in Hindi)

Corruption par nibandh : भ्रष्टाचार आज देश में ही नहीं यद्धपि पूरे विश्व की एक बड़ी भयानक समस्या है जो किसी न किसी रूप में सदैव कायम रहा है | यह समाज, देश की जड़ों में लगा ऐसा घुन है जो सभी आदर्शों और नैतिकता की जड़ों को धीरे – धीरे खोखला कर रहा है |

असल में आचरण व्यवहार का पतन ही भ्रष्टाचार होता है इस दृष्टी से भ्रष्टाचार शब्द का सामान्य अर्थ है मानव का अपने आचार – विचार से भ्रष्ट या पतित हो जाना | दरअसल मानवों से ही समाज, देश और राष्ट्र का स्वरुप बनकर विकास पाता है और जब यही मानव आचार – विचार में पतित हो जाए तो भ्रष्टाचार का भूत बड़ी भयानकता से सारे समाज और राष्ट्र को आक्रांत कर लिया करता है |

नव – निर्माण और विकास के दौर से गुजर रहे मानव के लिए ये एक बड़ा दुर्भाग्य है जो की  सारा संसार ही इस भयानक भ्रष्टाचार के शिकंजे में बुरी तरह फंसा है | हमारा देश भारत तो आज आमूल – चूल भ्रष्टाचार की दलदल में इतनी बुरी तरह निमग्न हो चूका है कि मानों भ्रष्ट हुए या किये बिना एक भी कदम चल पाना मुश्किल होता है |

आज भारत में भ्रष्टाचार के जितने रूप व्याप्त है दुनिया के शायद ही किसी अन्य देशों में मिलता हो | यहाँ तो कदम – कदम पर रिश्वत, भाई – भतीजावाद, मिलावट, मुनाफाखोरी, कालाबाजारी, कमीशनखोरी, दायित्व पालन में विमुखता, सरकारी साधनों का दुरुपयोग, विदेशी मुद्रा हेरा – फेरी, रक्षा सौदा में कमीशन, आयकर चोरी, ठेके आदि देने में जान – पहचान, सरकार बनाने और सरकार बचाने के लिए संसद – सदस्यों और विधान – सभा सदस्यों की खरीद – फरोस्त आदि सभी भ्रष्टाचार के रूप में मौजूद होने के परिणामस्वरुप प्रगति और विकास का लाभ सामान्य और आम जन तक नहीं पहुँच पा रहा है |

Corruption in hindi

ये तो भ्रष्टाचार के कुछ उदाहरण मात्र थे जबकि इनके अलावा भी भ्रष्टाचार के अनगिनत स्वरुप है | यह आवश्यक नहीं कि भ्रष्टाचार केवल धन के ही रूप में हो | भ्रष्टाचार के तो रोज नये स्वरुप बनते भी रहते है और अधिक से अधिक लाभ पाने की इच्छा और प्रक्रिया में पता नहीं आज भ्रष्टाचार के कितने रूप इजाद कर लिए गए है |

परिणाम आज हमारे सामने है कि आज कोई भी भ्रष्टाचार के बल पर अपार सम्पति जुटा लेने वाला भी संतुष्ट नहीं | अनेक प्रकार के पाप, दुराचार और अन्याय – अत्याचार बढ़ रहे है | कोई कहीं भी सुरक्षित नहीं है | राजनीति, प्रशासन, धर्म, समाज आदि कोई भी तो क्षेत्र इस भ्रष्टाचार के प्रभाव से अछूता नहीं | यहाँ तक कि वश चलते एक हाथ दूसरे हाथ तक को निगल जाना चाहता है | इसका प्रमाण तब मिलता है जब एक ही दफ्तर में लगभग समान स्तर पर और साथ – साथ बैठकर काम करने वाला भी एक – दूसरे का काम बिना मुट्ठी गर्म किये नहीं करना चाहता |

शिकायत करने पर बिजली विभाग या अन्य विभाग का कोई कर्मचारी हमारे घरों में अपनी ड्यूटी के समय में भी यदि कुछ ठीक करने आता है तो बिना बियर शराब की बोतल या नकद रिश्वत के काम नहीं करता | वह खुले रूप से इस सब की मांग करता , “ कर लो जो कुछ करना है किसी ने | बिना लिए दिए काम हो ही नहीं सकता | ” भ्रष्ट मानसिकता की यह चरम सीमा है |

घोषित और सर्वविदित अपराधी, स्मगलर, कातिल तक खुलेआम अपराध कर भ्रष्ट नौकरशाही को रिश्वत देकर साफ़ बरी हो जाते है | जो निरपराध है वह कानून के रक्षकों के शिकंजे में नाहक फसांया जाता है और रिश्वत दे पाने में असमर्थ होने के कारण यातनाएं तो झेलता ही है, कई बार मारा भी जाता है | सरकारी एजेंसियां जनता के लिए जनता के पैसे से मकान, पुल, सड़कें, आदि बनाती है या ठेकेदारों से बनवाती है | वे एक साधारण बरसात का दबाव न सह टूट – फूट कर बेचारे लोगों के प्राण तक भी हर लेती है |

इस प्रकार आज समूची नैतिकता, व्यवस्था ही भ्रष्ट होकर रह गयी है | दूध का धुला खोजने पर भी नहीं मिलता है और जो मिलता भी है उसे विनष्ट करने की तमाम चेष्टा की जाती है | हमारे सामने अजीब विवश स्थिति पैदा हो गई है लेकीन प्रश्न यह उठता है कि आखिर इसका क्या कारण है |

भ्रष्टाचार के कारण

मानव मन की इच्छाएँ, सुविधापूर्ण आरामदायक जीवन व्यतीत करने की लालसा भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा और मुख्य कारण है | अधिकाधिक भौतिक प्रगतियों, नए – नए अविष्कारों और उन्हें प्राप्त करने की इच्छा ने मानव मन को गहराई तक भ्रष्ट कर दिया है | उसकी इस प्रवृत्ति ने समस्त महान और उद्दात्त्त प्रवृत्तियों को त्याग दिया है | जब तृष्णा उपलब्ध साधनों से शांत नहीं होती तो उसकी पूर्ति के लिए ही भ्रष्ट तरीके अपनाएं जाते है | वास्तविकता तो यह है कि भौतिक सुख – सुविधाओं को बिना परिश्रम के सरलता से प्राप्त कर लेने की दौड़ ही भ्रष्टाचार का मूल कारण है |

भ्रष्टाचार मुक्त भारत Bhrashtachar Mukht Bharat (Corruption Free India) in Hindi

भारत में तो लोक प्रशासन के क्षेत्र का विलक्षण विकास होने के कारण भ्रष्टाचार की मात्रा में असाधारण वृद्दि हुई है | आज यहाँ भ्रष्टाचार के कारण एक मनुष्य ने दूसरे को आतंकित कर रखा है | भ्रष्टाचार की जड़े इतनी फैल चुकी है कि उन्हें काटना सरल नहीं है | आखिर कैसे बनेगा भ्रष्टाचार मुक्त भारत |

इस प्रश्न का एक ही उपाय हो सकता है कि भ्रष्टाचार से छुटकारा पाने के लिए निर्दयतापूर्वक कठोर से कठोर कदम उठाने के साथ – साथ सामाजिक व मनोवैज्ञानिक उपाय भी करने होंगे और इसके लिए भारत में भ्रष्टाचार नियंत्रण हेतु समय – समय पर विभिन्न संस्थाओं, कमेटियों एवं आयोगों का गठन किया जाता रहा है जिनमें से प्रमुख है –

भारत में भ्रष्टाचार नियंत्रण हेतु प्रशासनिक संस्था  

  1. विभागीय नियंत्रण
  2. क़ानूनी प्रावधान
  3. लेखा परिक्षण
  4. 1964 के पूर्व व्यवस्था
  5. केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरों (C. B. I.)
  6. केन्द्रीय सतर्कता आयोग (C. V. C.)
  7. मंत्रालय में सतर्कता आयोग
  8. राज्यों में सतर्कता आयोग
  9. लोकायुक / लोकपाल

ये एक कटु सत्य है कि कानून बनाकर और कठोर दंड देखकर भय तो उत्पन्न किया जा सकता है पर भ्रष्टाचार को समाप्त नहीं किया जा सकता | इसलिए दृढ़ संकल्प और नैतिक सक्रियता भ्रष्टाचार की समस्या से छुटकारा पाने के कारगर उपायों में एक सबसे अच्छा उपाय है | अगर लोग राष्ट्र और मानवता के प्रति अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन करें | अपने अंदर नैतिकता को जगाये | जियो और जीने दो के सिद्धांत को अपनायें तो भ्रष्टाचार की समस्या से मुक्ति पायी जा सकती है |

इसके अलावा हर धर्म, समाज और राजनीति के अगुआ स्वयं नैतिक बनकर कठोरता से नैतिकता के अनुशासन को लागू करें | जो सर्वविदित और घोषित अपराधी हैं, उनके साथ किसी भी प्रकार की रू-रियायत न बरते |

आज जन्म लेने वाली नयी पीढ़ी के सामने जब हम नैतिक मूल्यों और आदर्शों को स्थापित करना शुरू कर देंगे, जब भ्रष्ट हो चुकी पीढ़ी को बलपूर्वक दबा दिया जायेगा, तब कही जाकर इस स्थितिहीनता और भ्रष्टता का रोकथाम हो सकेगा |

भ्रष्टाचार मुक्त भारत देश तभी होगा जब लोग अपने मन पर संयम, इच्छाओं पर नियंत्रण, भौतिक उपलब्धियों की दौड़ से पीछा छुड़ाकर सहज स्वाभाविक जीवन व्यतीत करना आरम्भ करेंगे | ये सभी उपाएँ मिलकर यक़ीनन भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त करने में मदद करेंगी |

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